आपरेशन समानता: Rajasthan में आजादी के 75 साल बाद पहली बार घोड़ी पर बैठा दलित दूल्हा, पुलिस अधीक्षक ने किया बारात का स्वागत 

आपरेशन समानता के तहत जहाँ लड़की का नाम द्रोपदी है वही दूल्हे का नाम श्रीम है।

Marriage in Bundi चड़ी गांव में यहां दलित दूल्हे ने घोड़ी पर बैठकर बिंदौली निकाली। जिला पुलिस अधीक्षक जय यादव ने पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के प्रमुख लोगों के साथ बक्शपुरा गांव से आई बारात का स्वागत किया।

आपरेशन समानता क्या है?

 नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान में दलित दूल्हों को घोड़ी पर नहीं चढ़ने देने या फिर बिंदौली रोकने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा घटनाएं सूबे के बूंदी जिले में हुई हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन ने बूंदी जिले के 30 ऐसे गांव चिन्हित किए हैं, जिनमें आजादी के बाद से अब तक दलित दूल्हे को घोड़ी पर नहीं बैठने दिया गया।

आपरेशन समानता

अगर कोई दूल्हा घोड़ी पर बैठ भी गया तो उसकी बिंदौली गांव में से नहीं निकलने दी गई। यदि दूल्हे को पुलिस सुरक्षा में घोड़ी पर बिठा भी दिया गया तो बाद में उस परिवार को गांव से बहिष्कृत कर दिया गया। सोमवार से इन गांवों में “आपरेशन समानता” शुरू किया गया है। शुरुआत चड़ी गांव से की गई है, यहां दलित दूल्हे ने घोड़ी पर बैठकर बिंदौली निकाली।

जिला पुलिस अधीक्षक जय यादव ने पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के प्रमुख लोगों के साथ बक्शपुरा गांव से आई बारात का स्वागत किया। यहां मेघवाल परिवार की बेटी की शादी धूमधाम से हुई, जिसमें पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी मेजबान की भूमिका में रहे।

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पुलिस अधीक्षक का कहना है कि प्रत्येक गांव में समानता समितियां बनाई गई हैं। इन समितियों में सभी समाजों के लोगों व जनप्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। क्षेत्र के थाना अधिकारियों को आपसी सद्भावना कायम कराने का जिम्मा सौंपा गया है।

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