Rajasthan Diwas 2022 राजस्थान दिवस, राजस्थान स्थापना दिवस क्यों मनाया, Rajasthan sthapna Diwas kab manaya jata hai

Rajasthan Diwas 2022: सोने री धरती जठे, चांदी रो आसमान| रंग-रंगीलो रस भरियो, म्हारो प्यारो राजस्थान| 

आज राजस्थान का 72वां स्थापना दिवस (Rajasthan Day) मनाया जा रहा है। यह दिवस हर वर्ष 30 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन राजस्थान के लोगों की वीरता, दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बलिदान को नमन किया जाता है। यहां की लोक कलाएं, समृद्ध संस्कृति, महल, व्यंजन आदि एक विशिष्ट पहचान रखते हैं। इस दिन कई उत्सव और आयोजन होते हैं जिनमें राजस्थान की अनूठी संस्कृति का दर्शन होता है।

Rajasthan Diwas 2022 का महत्व

राजस्थान को राजाओं की भूमि के रूप से जाना जाता है। यह राज्य भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 10.4 प्रतिशत कवर करता है। उत्तर-पश्चिमी राज्य में राजपूतों की भूमि है, जिसमें 19 रियासतें 3 ठिकाने- लावा(जयपुर), कुशलगढ़(बांसवाड़ा) व नीमराना(अलवर) तथा एक चीफशिफ अजमेर-मेरवाड़ा थे। राजस्थान को पहले राजपूताना के नाम से जाना जाता था। कुल 19 रियासतों को मिलाकर यह राज्य बना तथा इसका नाम “राजस्थान” किया गया जिसका शाब्दिक अर्थ है “राजाओं का स्थान” क्योंकि स्वतंत्रता से पूर्व यहां कई राजा-महाराजाओं ने राज किया। 

राजस्थान का प्रथम नाम क्या था?

आजादी से पहले राजस्थान का नाम राजपूताना था। यह नाम 1800 ई. में ब्रिटिश गवर्नर जार्ज थॉमस ने दिया था। कर्नल जेम्स टॉड ने 1829 ईसा में अपनी पुस्तक ‘द एनाल्स एंड एक्टीविटीज ऑफ राजस्थान‘ में किया। कर्नल जेम्स टॉड ने राजस्थान को दी सेन्ट्रल वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स ऑफ इंडिया कहा है।

 

राजस्थान स्थापना दिवस का इतिहास

ऐसा रहा है राजस्थान का इतिहास

राजस्थान दिवस

राजस्थान का अस्तित्व प्रागैतिहासिक काल से ही मिलता है. समय-समय पर यहां चौहान, परमार, राठौड़, गहलोत वंशों का राज रहा है. मेवाड़, मारवाड़, जयपुर, बुंदी, कोटा, भरतपुर और अलवर बड़ी रियासतें थीं. मुगल और बाहरी आक्रांताओं के कई आक्रमणों ने धोरों के इतिहास को शौर्य गाथाओं से भर दिया. स्वाभिमान की जंग में पृथ्वी राज और महाराणा प्रताप से लेकर राणा सांगा, राणा कुंभा जैसे शूरवीर इस इतिहास को सहेजे रखा, वहीं तराइन, रणथंभौर, चित्तौड़, खानवा से लेकर हल्दी घाटी जैसे कई ऐतिहासिक युद्ध भी इस धरा पर लड़े गए.

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रंगीलो राजस्थान में ना केवल अनेक लोक नृत्य, व्यंजन बल्कि अनेकों भाषाओं के मिश्रित समूह को राजस्थानी भाषा का नाम दिया गया है. राजस्थान की खासियत भी यही है कि यहां पर हर थोड़ी दूरी पर भाषा का अंदाज बदलता है. इस भाषा में अधिक मात्रा में लोक गीत, संगीत, नृत्य, नाटक, कथा, कहानी आदि उपलब्ध है. हालांकि इस भाषा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं है. इस कारण इसे स्कूलों में पढ़ाया नहीं जाता है. परिणामस्वरूप, यह भाषा धीरे-धीरे ह्रास की ओर अग्रसर है. कुछ मातृभाषा प्रेमी व्यक्ति इस भाषा को सरकारी मान्यता दिलाने के प्रयास में जुटे हुए हैं.

राजस्थान की रियासतों को 15 अगस्त 1947 को भारत संघ में मिला दिया गया था, लेकिन उनका एकीकरण एक साल बाद ही हो पाया था। उस समय के राज्य में भरतपुर, अलवर, धौलपुर और करौली जैसी 21 छोटी और बड़ी रियासतें शामिल थीं। 25 मार्च 1948 को बांसवाड़ा, बूंदी, डूंगरपुर, झालावाड़, किशनगढ़, प्रतापगढ़, शाहपुरा, टोंक और कोटा जैसे राज्यों के एकीकरण से राजस्थान संघ अस्तित्व में आया। राजस्थान संघ के गठन के तीन दिन बाद ही उदयपुर के महाराणा ने राजस्थान संघ में शामिल होने का फैसला किया। 9 राज्यों के एकीकरण के बाद पं. जवाहरलाल नेहरू ने 18 अप्रैल, 1948 को संघ का उद्घाटन किया। 

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राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में हुआ। इसकी शुरुआत 18 अप्रैल 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली रियासतों के विलय से हुई।विभिन्न चरणों में रियासतें जुड़ती गईं तथा अंत में 30 मार्च 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों के विलय से “वृहत्तर राजस्थान संघ” बना और इसे ही राजस्थान स्थापना दिवस कहा जाता है। इसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की सक्रिय भूमिका रही।

इस दिन राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य केंद्र जयपुर होता है। इनमें कैमल टैटू शो, खेलकूद प्रतियोगिताएं, बच्चों के लिए फ़िल्म फेस्टिवल, विभिन्न संभागों की झांकियां एवं नृत्य, भजन, फैशन शो तथा संगीत कॉन्सर्ट का आयोजन शामिल है।

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