परमाणु बम क्या है : जब से पुतिन ने अपनी सेना को स्पेशल अलर्ट रहने के लिए कहा हर परमाणु बम को लेकर तब से युद्ध की गरमाहट ओर बढ़ गयी।

यूक्रेन पर जारी संकट के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी सेना को अपनी प्रतिरोधी शक्तियों को “स्पेशल अलर्ट” पर रखने का आदेश दिया है जिनमें परमाणु हथियार भी शामिल हैं. पुतिन ने अपने रक्षा प्रमुखों से कहा कि पश्चिम के आक्रामक बयानों की वजह से ऐसा करना ज़रूरी हो गया है.

वैसे, उनकी इस घोषणा का मतलब ये कतई नहीं है कि रूस परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करना चाहता है. मगर उनके इस एलान ने दुनिया में परमाणु हथियारों की चर्चा छेड़ दी है.

हालाँकि, शीत युद्ध के दौर के बाद से परमाणु हथियारों के भंडार में बहुत कमी आई है, मगर अभी भी दुनिया में सैकड़ों परमाणु हथियार हैं जिन्हें बहुत कम समय के भीतर दाग़ा जा सकता है.

क्या होते हैं परमाणु हथियार| परमाणु बम क्या है

ये बेहद शक्तिशाली विस्फोटक या बम हैं.

इन बमों को ताक़त या तो परमाणु के नाभिकीय या न्यूक्लियर कणों को तोड़ने या फिर उन्हें जोड़ने से मिलती है जिसे विज्ञान की भाषा में संलयन (fusion) या विखंडन (fission) कहा जाता है.

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से बड़ी मात्रा में रेडिएशन या विकिरण निलकता है और इसलिए इनका असर धमाके बाद बहुत लंबे समय तक रहता है.

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से बड़ी मात्रा में रेडिएशन या विकिरण निलकता है और इसलिए इनका असर धमाके बाद बहुत लंबे समय तक रहता है.

किन देशों के पास है परमाणु हथियार

दुनिया में अभी नौ देशों के पास परमाणु हथियार हैं.

ये देश हैं – अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ़्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इसराइल और उत्तर कोरिया.

भारत के पास कितने परमाणु बम है

परमाणु बम क्या है

 

सिप्री की रिपोर्ट के अनुसार परमाणु हथियारों के मामले में भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान उससे कहीं आगे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार 2021 तक भारत के पास जहाँ 150 परमाणु हथियार थे, वहीं पाकिस्तान के पास 160 और चीन के पास 320 परमाणु हथियार थे.

परमाणु शक्ति संपन्न देश

इन्हीं नौ देशों के पास परमाणु हथियार क्यों हैं

1970 में 190 देशों के बीच परमाणु हथियारों की संख्या सीमित करने के लिए एक संधि लागू हुई जिसका नाम है परमाणु अप्रसार संधि या एनपीटी.

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अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस और चीन भी इसमें शामिल हैं. मगर भारत, पाकिस्तान और इसराइल ने इसपर कभी हस्ताक्षर नहीं किया और उत्तर कोरिया 2003 में इससे अलग हो गया.

इस संधि के तहत केवल पाँच देशों को परमाणु हथियार संपन्न देश माना गया जिन्होंने संधि के अस्तित्व में आने के लिए तय किए गए वर्ष 1967 से पहले ही परमाणु हथियारों का परीक्षण कर लिया था.

ये देश थे – अमेरिका, रूस, फ़्रांस, ब्रिटेन और चीन. 

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